माफ़ी ~ Forgiveness


सरे आम जो बदनाम करते हो,
फ़िर माफ़ी क्यों छिपकर मांगते हो?
जाने ऐसी कौनसी ,
किससे छिपाने वाली बात हो गयी ?

इतनी बेदर्दी से जो दर्द दिया,
मेरी नफ़रत भी तुमसे खफ़ा हो गयी .

अब रूठी तो नहीं हूँ, ये पूछते हो.
क्यों तुमसे रूठूँ, ये सोचते हो.
हाँ. जब अनजाने थे, तो बात अलग थी.
अब तो जान बूझ कर बेगाने हुए.

तुमसे भला अब क्या शिक़वा  गिला,
वो तो तब था, जब तुम अपने थे.

वो स्नेह पर जो कीचड की छीटें पड़ीं,
मेरी आँखों से टपक कर सारी धुल गयीं .

बेदाग़ है अब जो दामन तुम्हारा,
तुम मेरी परवाह न करो.
मेरी माफ़ी बेहिसाब है.

ख़ुले आम ही नफ़रत कर लेते,
क्यों छिप कर ये वार किया?
वैसे भी ! मेरी सज़ा से कब तुम डरे हो !
जो अपनी नफ़रत जताने में इतना वक़्त लिया !

जाने ऐसी कौनसी
किससे छिपाने वाली बात हो गयी.
इतनी बेदर्दी से जो दर्द दिया,
मेरी नफ़रत भी तुमसे खफ़ा हो गयी…

 

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10 responses to “माफ़ी ~ Forgiveness

  1. Wow Pamela now in hindi..
    Very nice (y)

  2. awesome one

  3. Awesome poetry, Ms. P! Your Hindi posts are like a refresher class for me. It’s also nice to feel, connect and agree with what you express. 🙂
    Love this part:
    इतनी बेदर्दी से जो दर्द दिया,
    मेरी नफ़रत भी तुमसे खफ़ा हो गयी…

    • Than you so much. Yes, i am struggling with Hindi. But before I get started in Odia and Telugu someday, i want to just try my refresher luck ! hope you are doing great.

  4. राहुल

    अतिसुंदर

  5. Wah ….profound words very well composed and amazingly conveyed ……just in love with these lines amazing 😍

  6. mam English translation please

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