ज़रा इश्क़ सीखा दो !


एक बात पूछें तुमसे ,

ज़रा दिल पर हाथ रख कर केहना। 
जो इश्क़ हमसे सीखा था,
अब वो किससे करते हो ?
 
जो सीखा था तुमसे ,
वो किसी और से न कभी कर पाए। 
तुमको भूलाने की कोशिश की ,
और बेवजह पछताए। 
 
हमारी लड़ाई में 
हम दोनों ही हार जाते हैं। 
तैश तुम करते हो ,
और तरस हम जाते हैं … 
 
काफी वक़्त जो हो गया ,
वक़्त में बहुत कुछ सा खो गया …
तुम अब याद आते नहीं,
दुनिया से लड़, तुमसे मिल जाने की चाहतें नहीं। 
 
फ़िर भी तुमसे गुफ़्तगू का मोह है !
कुछ बातें ज़रा सी नयी,
बाकी कुछ पुरानी वही !
 
सच कहते हो तुम ,
तुमसे अब वो उलफ़त न रही। 
पर तुमसे जुड़ी हर लम्हे से है। 
 
मुझे अबके तुमसे, कोई प्रीत नहीं। 
पर दस साल पहले के, कुछ पल से है …
 
दस साल में तुम बदले , में बदली ,
न जाने क्या क्या बदल गया !
अगर ज़रा कुछ ठहर गया ,
तो तुमसे बातें करने का जुनून मेरा। 
 
जो पूछते हो तो लो सुनो !
 
तुमसे जो इश्क़ सीखा था,
उसे रोज़ इनसे करने की  ख़्वाहिश करती हूँ ….
मेरी नाकामियां मुझे चुभती  हैं 
और दुनिया हमें देख कहती है ,
‘ इश्क़ करना तो कोई इनसे सीखे !’
 
अब दुनिया को क्या मालूम ,
इश्क़ सीखने सिखाने की चीज़ होती ,
तो अनगिनत ये आरज़ू ,अधूरी क्यों रहती ! 

Love-300x225

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11 responses to “ज़रा इश्क़ सीखा दो !

  1. हिन्दी। 😍👍🏽

  2. Seriously Pam??? U r romantic too 😉

  3. masterpiece mam 🙂

  4. My teen age story …awesome Mam

  5. Incredible this is👌😍

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